
कभी थे आतंक का पर्याय, चंबल के बीहड़ों में अब मिलेगा ईको-टूरिजम को बढ़ावा
मंगलवार, 19 नवंबर 2019
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किसी समय में आतंक का पर्याय रहे चंबल घाटी के बीहड़, जहां खतरनाक डकैत छिपा करते थे, अब वही 15-20 फीट गहरी गलियां ईको-टूरिजम का सेंटर बनेंगी। केंद्र सरकार के ग्रीन अग्रीकल्चर प्रॉजेक्ट के तहत इस इलाके को विकसित किया जाएगा।
मध्य प्रदेश के श्योपुर और मुरैना में ईको टूरिजम को दिया जाएगा बढ़ावा
- चंबल के बीहड़ों में ग्रीन अग्रीकल्चर प्रॉजेक्ट के तहत किया जाएगा विकास
- बायोडायवर्सिटी को बचाते हुए होगा विकास, खेती पर भी दिया जाएगा ध्यानइसके लिए संयुक्त राष्ट्र ग्लोबल इन्वाइरनमेंट फसिलटी से मिलेंगे 240 करोड़
- इसके लिए संयुक्त राष्ट्र ग्लोबल इन्वाइरनमेंट फसिलटी से मिलेंगे 240 करोड़
भोपाल
किसी समय में आतंक का पर्याय रहे चंबल घाटी के बीहड़, जहां खतरनाक डकैत छिपा करते थे, अब वही 15-20 फीट गहरी गलियां ईको-टूरिजम का सेंटर बनेंगी। अगले सात सालों में इस इलाके को खेती समेत दूसरे तरीकों से विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। मध्य प्रदेश के श्योपुर और मुरैना के बीहड़ों को लैंडस्केप कन्जर्वेशन के मॉडल के तौर पर देखा जाता है। अब केंद्र सरकार के ग्रीन अग्रीकल्चर प्रॉजेक्ट के तहत इस इलाके को विकसित किया जाएगा।
इसके लिए संयुक्त राष्ट्र के फूड ऐंड अग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (FAO) और ग्लोबल इन्वाइरनमेंट फसिलटी (GEF) के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। जल्द ही इलाके की प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचाए बिना यहां काम शुरू किया जाएगा। ग्वालियर में 9 नवंबर को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ FAO के अधिकारियों की बैठक में इस प्रॉजेक्ट के कॉन्सेप्ट और प्रक्रियाओं पर काम चर्चा की गई थी।
खराब हो चुकी जमीन पर नजर
GEF के फंड से होने वाले इस प्रयोग के नैशनल प्रॉजेक्ट निदेशक आरबी सिन्हा ने कहा है, 'मध्य प्रदेश के प्रॉजेक्ट में बीहड़ों, खासकर नैशनल चंबल सैंक्चुअरी जहां घड़ियाल और गंगा के डॉल्फिन पाए जाते हैं, उन पर ध्यान दिया जाएगा।' सिन्हा ने बताया कि यह प्रॉजेक्ट बायोडायवर्सिटी और जंगल की जमीन और कृषि के इर्द-गिर्द घूमता है। उन्होंने कहा है कि भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक खराब हो चुकी 260 लाख हेक्टेयर जमीन को उपजाऊ बनाने का है और यह प्रॉजेक्ट इसी दिशा में काम करेगी।
240 करोड़ रुपये का फंड
साल 2019-2026 के दौरान ग्रीन अग्रीकल्चर प्रॉजेक्ट के तहत चार और जगहों को विकसित किया जाएगा। ग्लोबल इन्वाइरनमेंट फसिलटी ने इसके लिए करीब 240 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया है। मध्य प्रदेश के अलावा मिजोरम के डांपा, ओडिशा के सिमिलीपल, राजस्थान के बाड़मेर-जैसलमेर और उत्तराखंड के कॉर्बेट-राजाजी को भी इसमें शामिल किया गया है। इसके जरिए करीब 180 लाख हेक्टेयर जमीन को उपजाऊ बनाने का लक्ष्य है।