
'पिंक बॉल को मिले रिवर्स स्विंग इसलिए हाथ से की गई सिलाई'
मंगलवार, 19 नवंबर 2019
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जैसे-जैसे भारत-बांग्लादेश के बीच खेले जाने वाले पहले डे-नाइट टेस्ट की तारीख नजदीक आने लगी है वैसे-वैसे कई सवालों के जवाब भी जानकारों को मिलने लगे हैं। दुनिया भर में खेले गए पिंक बॉल टेस्ट में अब तक शिकायत रही है कि यह गेंद रिवर्स स्विंग नहीं होता है लेकिन SG कंपनी ने रिवर्स स्विंग मिलने के खास मकसद से बॉल की सिलाई हाथ से करने की बात कही है।
- एसजी कंपनी को गुलाबी गेंद को बनाने में फिलहाल लग रहे हैं 7 से 8 दिन
- पारंपरिक लाल बॉल की अपेक्षा थोड़ी सी भारी है SG का यह पिंक बॉल
- पिंक बॉल पूरी तरह तैयार करने के बाद फिर से की जाती है गुलाबी रंग की कोटिंग
नई दिल्ली
कोलकाता स्थित ईडन गार्डेंस स्टेडियम पहली बार भारत और बांग्लादेश के बीच शुक्रवार से शुरू होने वाले पहले ऐतिहासिक दिन-रात टेस्ट मैच के लिए पूरी तरह से तैयार है। दिन-रात टेस्ट मैच गुलाबी गेंद से खेला जाएगा और इस मैच को लेकर अब सबकी नजरें इस बात पर लगी हुई हैं कि क्या इस मैच में यह गेंद रिवर्स स्विंग होगी या नहीं।
इस बीच, बीसीसीआई के एक अधिकारी ने बताया कि मैदान पर रिवर्स स्विंग हासिल करने के लिए गुलाबी गेंद की सिलाई हाथ से की गई है ताकि यह रिवर्स स्विंग में मददगार साबित हो सके। अधिकारी ने कहा, 'गुलाबी गेंद को हाथ से सिलकर तैयार किया गया है ताकि यह अधिक से अधिक रिवर्स स्विंग हो सके। इसलिए गुलाबी गेंद से स्विंग हासिल करने में अब कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।'
गुलाबी गेंद को बनाने में लगभग सात से आठ दिन का समय लगाता है और फिर इसके बाद इस पर गुलाबी रंग के चमड़े लगाए जाते हैं। एक बार जब चमड़ा तैयार हो जाता है तो फिर उन्हें टुकड़ों में काट दिया जाता है, जो बाद में गेंद को ढंक देता है।
'लेंथ' में बदलाव करके बल्लेबाजों को चकमा दूंगा: शमीइसके बाद इसे चमड़े की कटिंग से सिला जाता है और एक बार फिर से रंगा जाता है और फिर इसे सिलाई करके तैयार किया जाता है। गेंद के भीतरी हिस्से की सिलाई पहले ही कर दी जाती है और फिर बाहर के हिस्से की सिलाई होती है।
कोचिंग करने के फैसले पर यह बोले युवराज सिंहएक बार मुख्य प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो फिर गेंद को अंतिम रूप से तौलने और उसे बाहर भेजने से पहले उस पर अच्छी तरह से रंग चढ़ाया जाता है। गुलाबी गेंद पारंपरिक लाल गेंद की तुलना में थोड़ी सी भारी है।