
एल्गार परिषद केस: 19 आरोपियों पर पीएम नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश का आरोप
शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019
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2018 में हुई भीमा-कोरेगांव हिंसा में एल्गार परिषद केस में 19 आरोपियों के नाम विशेष कोर्ट को भेजा गया है। इस केस में लगाए गए चार्ज में एक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश का भी है।
आरोपियों में मानवाधिकार वकील, एकडैमिक और लेखक समेत 9 ऐक्टिविस्ट्स शामिल हैं। इन लोगों को प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) से संपर्क के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इनके अलावा वामपंथी विचारधारा वाले संस्कृतिक संगठन कबीर कला मंच के 5 सदस्यों और 5 माओवादियों को भी आरोपी बनाया गया है।
कोर्ट को भेजे गए ड्राफ्ट में कहा गया है कि जिस तरह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की गई थी, उसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी हत्या की साजिश रची गई थी। अभियोजन ने 16 पन्नों का ड्राफ्ट स्पेशल UAPA जज एसआर नवंदर को भेजा है। इनमें से 8 में UAPA और 8 में आईपीसी की धाराओं का जिक्र है। माना जा रहा है कि कोर्ट 1 जनवरी को इन आरोपों पर बहस करेगा। इसके बाद केस में ट्रायल शुरू होगा।
पीएम मोदी की हत्या की साजिश
आईपीसी की धारा 121 और 121 A का जिक्र करते हुए ड्राफ्ट में कहा गया है कि गिरफ्तार किए गए 19 आरोपी, 'जो प्रतिबंधित आतंकी संगठन/असोसिएशन सीपीआई माओवादी और उसके फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन के ऐक्टिव सदस्य हैं। इन्होंने (केंद्रीय और राज्य) सरकार के खिलाफ जंग छेड़ी है और इसकी साजिश और नेपाल और मणिपुर के सप्लायर से 4,00,000 राउंड्स के साथ M-4 समेत दूसरे हथियारों की खरीद के लिए 8 करोड़ रुपये जुटाए और राजीव गांधी की तरह रोड शो के दौरान नरेंद्र मोदी की हत्या करने का प्लान बनाया।'
कोरेगांव-भीमा हिंसा में भूमिका
पुणे पुलिस के केस के मुताबिक 31 दिसंबर, 2017 को सीपीआई (माओवादी) के फंड से एल्गार परिषद का आयोजन किया गया जो सरकार को हटाने की साजिश का एक हिस्सा था। पुलिस ने दावा किया कि यहां दिए गए कथित भड़काऊ बयानों ने 1 जनवरी, 2018 को कोरेगांव-भीमा की जातिवादी हिंसा में भूमिका निभाई। 6 जून, 2018 के बाद से पुलिस ने 9 ऐक्टिविस्ट्स- सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन, महेश राउत, पी वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा और वर्नन गोन्साल्वेज को सीपीआई (माओवादी) से कथित संबंधों के लिए गिरफ्तार किया है।
'अंडरग्राउंड, भगोड़े और वॉन्टेड'
इन 9 कार्यकर्ताओं और अंडरग्राउंड माओवादियों, मिलिंद तेलतुंबड़े, रितुपर्ण गोस्वामी और प्रशांतो बोस के खिलाफ 15 नवंबर, 2018 और 21 फरवरी, 2019 को दो चार्जशीट फाइल की गईं। केकेएम के सदस्यों और माओवादी ऑपरेटिव्स को ड्राफ्ट में 'अंडरग्राउंड, भगोड़े और वॉन्टेड' बताया गया है। सरकारी वकील और पुणे की जिला सरकार की वकील उज्जवला पवार ने बताया, 'सबूत रिकॉर्ड करते वक्त हम यह ऐप्लिकेशन देंगे कि ड्राफ्ट में दिए गए चार्ज वॉन्टेड/भगोड़ आरोपियों के खिलाफ उन्हें गिरफ्तार करने पर लगाए जाएं।'
भारत के खिलाफ जंग छेड़ने का आरोप
केकेएम और ऐसे संगठन इंडियन असोसिएशन ऑफ पीपल्स लॉयर, अनुराधा घांडी मेमोरियल कमिटी और परसिक्यूटिड प्रिजनर सॉलिडॉरिटी कमिटी को सीपीआई(एम) के फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन के तौर पर बताया गया है। यह भी कहा गया है कि आरोपी इन संगठनों में काम कर देश में क्रांतिकारी आधार बनाने और भारत के खिलाफ जंग छेड़ने के माओवादियों के उद्देश्य को हासिल कर रहे थे।
आगे यह कहा गया है कि सरकार को हटाने और अवैध गतिविधियों की कोशिश में एल्गार परिषद का आयोजन किया गया था। इन गतिविधियों में लोगों को भड़काना और हिंसा भड़काना, फंड का आयोजन और आतंकी गतिविधियों के लिए काडर रिक्रूट करना शामिल है।
कोर्ट को भेजे गए ड्राफ्ट में कहा गया है कि जिस तरह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की गई थी, उसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी हत्या की साजिश रची गई थी। अभियोजन ने 16 पन्नों का ड्राफ्ट स्पेशल UAPA जज एसआर नवंदर को भेजा है। इनमें से 8 में UAPA और 8 में आईपीसी की धाराओं का जिक्र है। माना जा रहा है कि कोर्ट 1 जनवरी को इन आरोपों पर बहस करेगा। इसके बाद केस में ट्रायल शुरू होगा।
पीएम मोदी की हत्या की साजिश
आईपीसी की धारा 121 और 121 A का जिक्र करते हुए ड्राफ्ट में कहा गया है कि गिरफ्तार किए गए 19 आरोपी, 'जो प्रतिबंधित आतंकी संगठन/असोसिएशन सीपीआई माओवादी और उसके फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन के ऐक्टिव सदस्य हैं। इन्होंने (केंद्रीय और राज्य) सरकार के खिलाफ जंग छेड़ी है और इसकी साजिश और नेपाल और मणिपुर के सप्लायर से 4,00,000 राउंड्स के साथ M-4 समेत दूसरे हथियारों की खरीद के लिए 8 करोड़ रुपये जुटाए और राजीव गांधी की तरह रोड शो के दौरान नरेंद्र मोदी की हत्या करने का प्लान बनाया।'
कोरेगांव-भीमा हिंसा में भूमिका
पुणे पुलिस के केस के मुताबिक 31 दिसंबर, 2017 को सीपीआई (माओवादी) के फंड से एल्गार परिषद का आयोजन किया गया जो सरकार को हटाने की साजिश का एक हिस्सा था। पुलिस ने दावा किया कि यहां दिए गए कथित भड़काऊ बयानों ने 1 जनवरी, 2018 को कोरेगांव-भीमा की जातिवादी हिंसा में भूमिका निभाई। 6 जून, 2018 के बाद से पुलिस ने 9 ऐक्टिविस्ट्स- सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन, महेश राउत, पी वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा और वर्नन गोन्साल्वेज को सीपीआई (माओवादी) से कथित संबंधों के लिए गिरफ्तार किया है।
'अंडरग्राउंड, भगोड़े और वॉन्टेड'
इन 9 कार्यकर्ताओं और अंडरग्राउंड माओवादियों, मिलिंद तेलतुंबड़े, रितुपर्ण गोस्वामी और प्रशांतो बोस के खिलाफ 15 नवंबर, 2018 और 21 फरवरी, 2019 को दो चार्जशीट फाइल की गईं। केकेएम के सदस्यों और माओवादी ऑपरेटिव्स को ड्राफ्ट में 'अंडरग्राउंड, भगोड़े और वॉन्टेड' बताया गया है। सरकारी वकील और पुणे की जिला सरकार की वकील उज्जवला पवार ने बताया, 'सबूत रिकॉर्ड करते वक्त हम यह ऐप्लिकेशन देंगे कि ड्राफ्ट में दिए गए चार्ज वॉन्टेड/भगोड़ आरोपियों के खिलाफ उन्हें गिरफ्तार करने पर लगाए जाएं।'
भारत के खिलाफ जंग छेड़ने का आरोप
केकेएम और ऐसे संगठन इंडियन असोसिएशन ऑफ पीपल्स लॉयर, अनुराधा घांडी मेमोरियल कमिटी और परसिक्यूटिड प्रिजनर सॉलिडॉरिटी कमिटी को सीपीआई(एम) के फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन के तौर पर बताया गया है। यह भी कहा गया है कि आरोपी इन संगठनों में काम कर देश में क्रांतिकारी आधार बनाने और भारत के खिलाफ जंग छेड़ने के माओवादियों के उद्देश्य को हासिल कर रहे थे।
आगे यह कहा गया है कि सरकार को हटाने और अवैध गतिविधियों की कोशिश में एल्गार परिषद का आयोजन किया गया था। इन गतिविधियों में लोगों को भड़काना और हिंसा भड़काना, फंड का आयोजन और आतंकी गतिविधियों के लिए काडर रिक्रूट करना शामिल है।