जानें, कैसे सबसे ज्यादा वोट और सीट पाकर भी सत्ता से दूर रह गई बीजेपी

जानें, कैसे सबसे ज्यादा वोट और सीट पाकर भी सत्ता से दूर रह गई बीजेपी

बीजेपी ने झारखंड विधानसभा के चुनाव में 81 में से 30 सीटों पर बढ़त बनाई है और अब तक के आंकड़ों के मुताबिक 33.7 पर्सेंट वोट हासिल किए हैं, जो सबसे ज्यादा है। दूसरी तरफ जेएमएम को 18.69 पर्सेंट, कांग्रेस को 13.77 फीसदी और आरजेडी को 2.89 पर्सेंट वोट मिले हैं।

रांची
सीटों में सबसे बड़े पार्टी और वोट प्रतिशत में भी नंबर वन पर रहने के बाद भी बीजेपी सत्ता से दूर हो गई। झारखंड के चुनाव का शायद यही वास्तविक नतीजा है। बीजेपी ने झारखंड विधानसभा के चुनाव में 81 में से 30 सीटों पर बढ़त बनाई है और अब तक के आंकड़ों के मुताबिक 33.7 पर्सेंट वोट हासिल किए हैं, जो सबसे ज्यादा है। दूसरी तरफ जेएमएम को 18.69 पर्सेंट, कांग्रेस को 13.77 फीसदी और आरजेडी को 2.89 पर्सेंट वोट मिले हैं।
इस तरह से जेएमएम महागठबंधन ने करीब 35 फीसदी वोट हासिल किए, जो बीजेपी से महज डेढ़ पर्सेंट ही ज्यादा है। लेकिन, राजनीति में एक और एक ग्यारह का सिद्धांत चलता है और शायद यही वजह थी कि तीनों दलों ने मिलकर बहुमत के जादुई आंकड़े 41 को हासिल कर लिया। वहीं, पिछली बार आजसू के साथ मिलकर लड़ने वाली बीजेपी को असफलता हाथ लगी है।
आजसू को 8.42 पर्सेंट वोट मिले हैं। यदि उसके और बीजेपी के वोटों को मिलाकर देखा जाए तो समझा जा सकता है कि तस्वीर कैसे बदल सकती है। बीजेपी और आजसू यदि साथ चुनाव लड़ते तो आंकड़ा 42 प्रतिशत के करीब होता, जो निश्चित तौर पर जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी के मुकाबले निर्णायक बढ़त देता
गठबंधन न साधने से नहीं सध पाई सत्ता?
चुनाव से पहले बीजेपी और आजसू के बीच लंबी रस्साकशी देखने को मिली थी। आखिर में सीटों के बंटवारे पर सहमति न बनने के चलते दोनों ही दलों ने अपनी राह अलग कर ली थी। इसके अलावा 0.71 प्रतिशत वोट हासिल करने वाली जेडीयू और 0.27 पर्सेंट वोट पाने वाली एलजेपी के अलगाव ने भी बीजेपी की संभावनाओं को कमजोर किया। खासतौर पर ऐसे चुनाव में जहां डेढ़ पर्सेंट वोट के अंतर ने ही सत्ता का समीकरण तय किया है।
बागी भी पड़ गए भारी, संभाल नहीं पाए रघुबर
झारखंड चुनाव से ठीक पहले बीजेपी को अपने ही नेताओं से काफी बड़े झटके लगे। एक तरफ सरकार में नंबर दो रहे सरयू राय सीएम के खिलाफ ही मैदान में उतर गए तो भगवा पार्टी के बड़े नेता राधाकृष्‍ण किशोर ने बीजेपी का दामन छोड़कर एजेएसयू के साथ हाथ मिला लिया। किशोर का एजेएसयू में जाना बीजेपी के लिए बड़ा झटका रहा।

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