
जज से भी भिड़े, जानें कौन हैं निर्भया केस में दोषियों को बचाते आ रहे वकील एपी सिंह
शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2020
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नई दिल्ली
'न मैं परमात्मा हूं, न यमराज, मैं वकील हूं, जो मेरा क्लाइंट कहेगा, उसे संविधान के अनुसार सभी कानूनी विकल्प उपलब्ध कराऊंगा' यह बात एपी सिंह ने निर्भया के दोषियों के लिए तीसरी बार डेथ वॉरंट जारी होने के बाद एक हिंदी दैनिक से कही। देश को झकझोर कर रख देने वाले निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस में एपी सिंह ही दोषियों के वकील हैं जिनकी चर्चा हर सुनवाई के बाद होती है। चौथे दोषी पवन गुप्ता ने आज क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल की है। ऐसे में वकील एपी सिंह फिर सुर्खियों में हैं। आइए जानते हैं दोषियों और फांसी के बीच की दीवार बन गए इस चर्चित वकील के बारे में...16 दिसंबर 2012 की रात चलती बस में 6 दरिंदों ने पैरामेडिकल की एक स्टूडेंट के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। गैंगरेप के दौरान बुरी तरह मारपीट कर उसे और उसके दोस्त को सड़क पर फेंक दिया। सुबह होते-होते यह घटना पूरे देश में आग की तरह फैल गई, लोग सड़क पर उतर आए, दोषियों को फांसी देने की मांग की जाने लगी। सभी छह आरोपियों को पकड़ा गया, जिसमें से एक ने तिहाड़ में कथित रूप से खुदकुशी कर ली, जबकि एक जुवेनाइल होम में तीन साल बिताने के बाद रिहा कर दिया गया, बाकी चार को दोषी साबित कर फांसी की सजा सुनाई गई।
कानूनी नियमों के तहत दोषियों को वकील मुहैया कराया गया। देशभर के लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि आखिर इन हैवानों की तरफ से केस कौन लड़ेगा, इस बीच एपी सिंह का नाम सामने आया। पिछले 7 सालों से लोगों का गुस्सा इस वकील पर भी उतरा और लोग यह भी कहते सुने गए कि 'इसे भी फांसी पर टांग देना चाहिए।' लोगों के गुस्से की वजह यह है कि एपी सिंह की कानूनी मदद के कारण ही अब तक दो बार डेथ वॉरंट टालने में दोषी सफल रहे हैं और अभी भी चौथे दोषी पवन गुप्ता के पास दया याचिका व क्यूरेटिव पिटिशन का विकल्प बचा है।
लखनऊ से पढ़ाई, मां के कहने पर लड़ रहे यह केस
लखनऊ यूनिवर्सिटी से लॉ ग्रैजुएट एपी सिंह के पास डॉक्टरेट की भी डिग्री है। 1997 में बतौर वकील उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वकालत शुरू की थी। सबसे पहले वह 2012 में साकेत कोर्ट में दोषियों की तरफ से पेश हुए। तब से अपने मुवक्किल को बचाने में हर कानूनी-दांवपेच अपना रहे हैं। एपी सिंह ने मीडिया को बताया था कि उनकी मां ने उन्हें यह केस लेने कहा था।
उन्होंने बताया कि चार दोषियों में से एक अक्षय ठाकुर की पत्नी अपने पति से मिलने के लिए बिहार से तिहाड़ जेल पहुंची थी। इसी दौरान किसी ने उसे मेरा मोबाइल नंबर दिया था। वह मेरे घर आई और मेरी मां से मिली। दोषियों के वकील बताते हैं कि मैंने अपनी मां से कहा कि इस केस को लड़ने के क्या परिणाम हो सकते हैं, लेकिन मेरी मां ने एक पत्नी को न्याय दिलाने के लिए मुकदमा लड़ने को मनाया।
...मेरी बेटी होती तो आग लगा देता
यह वही एपी सिंह हैं जिन्होंने निर्भया के रात में एक पुरुष दोस्त के साथ घूमने पर ही सवाल दाग दिए थे और कहा था कि यह उनके समाज में होता होगा, लेकिन हमारे समाज में नहीं होता। उन्होंने यह तक कह डाला था, 'अगर उनकी बेटी या बहन शादी से पहले इस तरह के संबंधों में होती तो वह उन्हें फार्महाउस में ले जाकर पूरे परिवार के सामने पेट्रोल छिड़ककर आग लगा देते।' उनके इस बयान से उन्हें काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था। एपी सिंह ने यही बात भारत में बैन हो चुकी विदेशी न्यूज चैनल की एक डॉक्यूमेंट्री में भी दोहराई थी, जिसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कारण बताओ नोटिस जार किया था।
जबजज पर ही उठा दिया सवाल
13 सितंबर, 2013 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पर ही उन्होंने सवाल दाग दिए थे जब उन्होंने दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। एपी सिंह ने कहा, 'आपने सच को नहीं झूठ को जिताया। यह फैसला राजनीतिक दबाव में लिया गया है और वोट बैंक पॉलिटिक्स के कारण लिया गया है।' जज पर भड़कने के कारण बार काउंसिल ने उनकी आलोचना की थी और कहा था कि यह कोर्ट की अवमानना है।
वेलेंटाइन डे बैन करने से रुकेगा रेप
डॉक्यूमेंट्री में दिए गए बयान पर बार काउंसिल की नोटिस का सामना करने के बाद भी एपी सिंह की जुबान नहीं रुकी। 2015 में एपी सिंह उस वक्त विवादों में घिर गए थे जब उन्होंने 'वेलेंटाइन डे' और 'किस ऑफ लव' कैम्पेन को बैन करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि इनपर बैन लगाने से ही रेप पर रोक लगेगी।