वोडा आइडिया ने कारोबार समेटा तो बढ़ेंगी जियो, एयरटेल की मुश्किलें!

वोडा आइडिया ने कारोबार समेटा तो बढ़ेंगी जियो, एयरटेल की मुश्किलें!



 

 कोलकाता

एजीआर बपकाये के चलते अगर वोडाफोन आइडिया को अपना बोरिया-बिस्तर समेटने की नौबत आती है तो एयरटेल और रिलायंस जियो के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। अचानक दोनों की लागत बढ़ सकती है। संचालन का खर्च अचानक काफी बढ़ सकता है। ऐनालिस्ट्स का मनना है कि 30 करोड़ के यूजर बेस वाले वोडा आइडिया के दिवालिया होने से दोनों कंपनियों की लागत 15 से 20 पर्सेंट तक बढ़ सकती है
नेटवर्क वेंडर्स की मुश्किल
अगर घाटे में चल रही वोडाफोन आइडिया एजीआर क़ा बकाया चुकाने में नाकाम रहती है और अपना कारोबार समेटने के लिए मजबूर होती है तो टेलिकॉम कंपनी के नेटवर्क वेंडर्स को तकरीबन 4,000 करोड़ रुपये का भुगतान लेने की खातिर कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है। यह आशंका ऐनालिस्ट्स और इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव्स ने जाहिर की है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में टेलिकॉम उपकरण बनाने वाली कुछ बड़ी कंपनियों को भारत में अपना कारोबार घटाना या फिर बंद करना पड़ सकता है क्योंकि देश में भारती एयरटेल और रिलायंस जियो इन्फोकॉम की प्राइवेट डुओपॉली के बाद पांच ग्लोबल वेंडर्स के कामकाज करने की गुंजाइश नहीं रहेगी।
हुआवे और ZTE को दिक्कतें
चाइनीज वेंडर्स हुआवे और ZTE को अपने पैसे वापस पाने में ज्यादा दिक्कत होने की आशंका है क्योंकि उनके पास लेटर्स ऑफ क्रेडिट (एलसी) नहीं है। इस मामले से एक वाकिफ एक सूत्र ने बताया कि यूरोपियन वेंडर्स नोकिया और एरिक्सन के पास एलसी है जिसका मतलब यह है कि अगर वोडाफोन आइडिया दिवालिया कार्यवाही के लिए नैशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) में याचिका दाखिल करती है तो उनके पास अपने बकाये का कुछ हिस्सा वसूलने का मौका रहेगा। वोडाफोन आइडिया पर हुआवे और ZTE की 30 करोड़ डॉलर से ज्यादा देनदारी है जबकि इसे नोकिया और एरिक्सन को कुल मिलाकर तकरीबन 24 करोड़ डॉलर चुकाने हैं। एलसी बैंक का लेटर होता है जो गारंटी देता है कि इक्विपमेंट खरीदने वाले का भुगतान वेंडर को मिलेगा। अगर खरीदार भुगतान करने में नाकाम रहता है तो बैंक को इसे कवर करना होगा।
टावर कंपनियों को झटका
इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि अगर वोडाफोन आइडिया का ऑपरेशन बंद होता है तो अमेरिका की अमेरिकन टावर कॉर्प (ATC) जैसी टावर कंपनियों को भी झटका लगेगा। इसने कुछ साल पहले वित्तीय संकट से जूझ रही टेलिकॉम कंपनी के 20,000 स्टैंडअलोन टावर को 1 अरब डॉलर से अधिक में खरीदा था। भारती एयरटेल के पूर्व सीईओ संजीव कपूर ने कहा, ‘अगर वोडाफोन आइडिया दिवालियापन की कार्यवाही शुरू करने के लिए याचिका दाखिल करती है तो इसके स्टैंडअलोन टावर्स को 7,850 करोड़ रुपये में खरीदने वाले ATC को भारी नुकसान हो सकता है क्योंकि यूएस टावर कंपनी को डुओपॉली स्ट्रक्चर वाले टेलिकॉम सेक्टर में नए ग्राहक खोजने में काफी मुश्किलहोगी।
जियो खुद बना रही अपने टावर्स
खासकर, यह देखते हुए कि जियो अपने खुद के टावर्स बना रही है और एयरटेल का भारती इन्फ्राटेल और इंडस के साथ करार है।’ ऐनालिस्ट्स का कहना है कि अगर टेलिकॉम मार्केट में डुओपॉली होती है तो ग्लोबल नेटवर्क वेंडर्स के लिए कारोबार जारी रखना मुश्किल हो जाएगा और वे भारत के बारे में अपनी योजना की समीक्षा करने पर मजबूर हो जाएंगी। जियो चूंकि सिर्फ सैमसंग से गियर खरीदती है, इसलिए बाकी चार वेंडर्स पर भविष्य के कारोबार और आमदनी के लिए सिर्फ भारती एयरटेल पर निर्भर होने का जोखिम रहेगा।


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