Migrants missing: 'चलती ट्रेन' से 338 मजदूर लापता, वडोदरा-बांदा श्रमिक स्पेशल में थे 1908
गुरुवार, 14 मई 2020
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बांदा
प्रवासी मजदूरों को लेकर श्रमिक स्पेशल ट्रेनें यूपी के अलग-अलग इलाकों में पहुंच रही हैं। इस बीच गुजरात के वडोदरा से आई ऐसी ही एक ट्रेन से 338 मजदूर लापता हैं। वडोदरा से श्रमिक स्पेशल 1908 प्रवासी मजदूरों को लेकर रवाना हुई थी। लेकिन जब यह ट्रेन बांदा रेलवे स्टेशन पहुंची तो सिर्फ 1570 मजदूर ही उतरे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि 338 मजदूर कहां लापता हो गए? यह मजदूर आखिर कहां चले गए? कहीं वे रास्ते के किसी दूसरे स्टेशन पर तो नहीं उतर गए?
48 जिलों के 1908 मजदूर बैठे थे?
बांदा का जिला प्रशासन इस मामले का पता लगाने में जुटा हुआ है। वडोदरा से प्रवासी मजदूरों को लेकर यह ट्रेन बीते बुधवार को बांदा आई थी। इस ट्रेन में उत्तर प्रदेश के 48 जिलों के 1908 मजदूर थर्मल स्क्रीनिंग के बाद बिठाए गए थे। लेकिन बांदा स्टेशन पर जब ट्रेन से कुल 1570 मजदूर ही उतरे तो प्रशासन के होश फाख्ता हो गए।
वडोदरा के एडीएम ने भेजा था खत
मजदूरों को भेजने के साथ वडोदरा के एडीएम डीआर पटेल ने सभी मजदूरों की जानकारी और संख्या का जिक्र करते हुए बांदा जिला प्रशासन को एक खत भेजा था। ट्रेन से उतरने के बाद 338 मजदूरों की कोई जानकारी नहीं मिलने पर प्रशासनिक अधिकारियों को पसीना छूट गया है। इतने सारे मजदूर कहां गए, इसका किसी को कोई पता नहीं है। बांदा जिला प्रशासन ने इस सिलसिले में वडोदरा प्रशासन से संपर्क किया है। अब गुमशुदा मजदूरों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
ट्रेन का नहीं था कहीं कोई स्टॉपेज
हैरानी की बात यह है कि इस ट्रेन का और कहीं स्टॉपेज भी नहीं था। प्रशासनिक अधिकारियों और ट्रेन ड्राइवर के मुताबिक वडोदरा और बांदा के बीच रास्ते में स्पेशल ट्रेन का कोई ठहराव नहीं था। ट्रेन सीधे बांदा में ही रोकी गई थी। ट्रेन में सवार मजदूरों के मुताबिक रास्ते में पड़ने वाले स्टेशनों और आउटर पर ट्रेन की रफ्तार धीमी जरूर होती थी, लेकिन रोकी कहीं नहीं गई। श्रमिक स्पेशल वडोदरा से सीधे बांदा में ही रुकी। इसके बावजूद गिनती में 1570 मजदूर ही पाए गए।
'लिस्ट बनाने में चूक की संभावना'
इस मामले में चित्रकूटधाम मंडल बांदा के कमिश्नर गौरव दयाल का कहना है, 'हम वडोदरा प्रशासन से संपर्क कर जानकारी जुटा रहे हैं। हो सकता है कि कम पाए गए 338 मजदूर ट्रेन में सवार ही न हुए हों? या सूची में गलती हो सकती है। 22 डिब्बों की ट्रेन में मानक के अनुसार 1908 मजदूर नहीं बैठाए जा सकते। इस बात की संभावना ज्यादा है कि सूची बनाने में चूक हुई हो। फिर भी हम इसकी जांच-पड़ताल करा रहे हैं।'
यूपी में 301 ट्रेनों से पहुंचे 3.61 लाख मजदूर
देश के दूसरे राज्यों में रोजी-रोटी के लिए गए मजदूरों को वापस लाने के लिए चलाए जा रहे अभियान में यूपी पहले नंबर पर है। बुधवार तक यूपी के मजदूरों को लेकर 301 स्पेशल ट्रेनें अलग-अलग जिलों तक पहुंच चुकी हैं। इनसे 3.61 लाख से भी ज्यादा मजदूर अपने घर आ चुके हैं। महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, गुजरात सहित कई राज्यों से यूपी के मजदूरों के लिए स्पेशल ट्रेनों का सिलसिला लगातार चल रहा है।
बुधवार को यूपी के कई जिलों से मजदूरों के कोरोना संक्रमित मिलने की खबर आई। लखीमपुर में 9 नए पॉजिटिव केस प्रवासियों से जुड़े हैं। ये लोग मुंबई के धारावी से आए थे। इसी तरह इटावा जिले में गुजरात के अहमदाबाद से आई श्रमिक एक्सप्रेस में एक कोरोना पॉजिटिव मिला है। वह ट्रेन से अपने परिवार के 10 लोगों के साथ लौटा था। औरैया जिले में अहमदाबाद से लौटे 2 लोगों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। संतकबीरनगर जिले में मुंबई से आए शख्स ने स्क्रीनिंग सेंटर के बाहर दम तोड़ दिया था। मृतक की जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। इसी तरह मंगलवार को सुलतानपुर जिले में अहमदाबाद से ट्रक के जरिए पहुंचे चार लोग पॉजिटिव मिले थे।